पटना न्यूज डेस्क: पटना में एक अनोखा मामला सामने आया, जब शहर के प्रसिद्ध 89 वर्षीय हड्डी रोग विशेषज्ञ कैप्टन डॉ. विजय शंकर सिंह खुद गंभीर चोट का शिकार हो गए। उनका कुल्हा (हिप) टूट गया, और फिर उनके इलाज ने चिकित्सा जगत में मिसाल कायम कर दी। यह सर्जरी रोबोटिक तकनीक से की गई, जिससे महज कुछ घंटों में ही डॉक्टर अपने पैरों पर खड़े हो गए।
दरअसल, डॉ. विजय शंकर सिंह एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस से सहरसा से पटना लौट रहे थे। रास्ते में चाय पीने के लिए रुके, लेकिन कुर्सी टूटने से गिर पड़े और गंभीर चोट लग गई। पटना पहुंचकर उन्होंने एक्स-रे कराया, जिससे पता चला कि उनका कुल्हा टूट चुका है। इसके बाद वे सीधे रोबोटिक सर्जरी एक्सपर्ट डॉ. आशीष सिंह के अनूप सुपर स्पेशियलिटी यूनिट पहुंचे, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि उनकी सर्जरी सुबह हुई और शाम तक वे अपने पैरों पर खड़े हो गए। अगले दिन उन्होंने खुद से अपने काम करने शुरू कर दिए और महज तीन दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए। इस तेजी से हुई रिकवरी ने न सिर्फ मरीज को बल्कि मेडिकल जगत को भी चौंका दिया।
डॉ. विजय शंकर सिंह ने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो डॉ. आशीष सिंह थोड़ा तनाव में दिखे, क्योंकि वे खुद एक वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। लेकिन उन्होंने कहा, "मैं यहां सिर्फ एक मरीज हूं और आप मेरे सर्जन।" इसके बाद सर्जरी बिना किसी जटिलता के पूरी हुई। इस सफलता के चलते 50 से ज्यादा डॉक्टरों ने डॉ. आशीष सिंह का सम्मान करने का फैसला किया।
डॉ. आशीष सिंह, जो पटना में रोबोटिक सर्जरी की नई तकनीक लेकर आए हैं, ने कहा कि उनके लिए यह गर्व का क्षण था। उन्होंने बताया कि उनके मरीज का जितना अनुभव है, उतनी उनकी उम्र भी नहीं है। इस तकनीक की मदद से सर्जरी महज 40-50 मिनट में पूरी हो जाती है, जबकि पारंपरिक सर्जरी में 3-4 घंटे लगते हैं। मरीज को कम दर्द होता है, खून कम गिरता है और रिकवरी बेहद तेजी से होती है।
इस एडवांस तकनीक का असर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों तक है। डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि इंग्लैंड, बांग्लादेश और भूटान से भी मरीज पटना में इलाज कराने आ रहे हैं। रोबोटिक सर्जरी की सफलता ने बिहार को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है।