पटना न्यूज डेस्क: पटना हाई कोर्ट ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की जाए, जो 24 घंटे कार्यरत रहे और जिसे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल माध्यमों से व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की 17 फरवरी 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ, जिसमें राज्य की मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं, खासकर बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेज, कोइलवर में कई कमियों की ओर इशारा किया गया था।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हेल्पलाइन पर मिलने वाली सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाए। संबंधित पुलिस को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 की धारा 100 के तहत जरूरी कदम उठाने होंगे, जिसमें मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के इलाज और पुनर्वास की जिम्मेदारी शामिल है। साथ ही पुलिस अधिकारियों को इस कानून के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि मानसिक रोग से ठीक हो चुके लोगों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। कोर्ट ने राज्य से पूछा कि उन्हें किस प्रकार का कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उसके परिणाम क्या हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि ऐसे लोगों को रोजगार और आर्थिक सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
कोर्ट ने एमिकस क्यूरी द्वारा दिए गए सुझावों पर भी विचार करने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, BIMHAS के निदेशक, पुलिस महानिदेशक और कारागार महानिरीक्षक को वर्चुअली उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।