पटना न्यूज डेस्क: बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी बेदखली नोटिस के बावजूद राबड़ी देवी ने साफ कर दिया है कि वह 10, सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली नहीं करेंगी। उनका कहना है कि यदि सरकार चाहे तो बल प्रयोग कर उन्हें हटाने की कोशिश कर सकती है, लेकिन वह स्वेच्छा से यह आवास नहीं छोड़ेंगी।
दरअसल, बिहार सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए 10, सर्कुलर रोड बंगले को उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया है। हालांकि राबड़ी देवी के इस नए आवास में जाने से इनकार के पीछे एक दिलचस्प कारण भी चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में यह धारणा प्रचलित है कि इस बंगले में रहने वाले कई पूर्व मंत्री बाद में राजनीतिक रूप से हाशिये पर चले गए और दोबारा मंत्री नहीं बन सके।
राबड़ी देवी पिछले 21 वर्षों से सर्कुलर रोड स्थित इसी सरकारी आवास में रह रही हैं। यह बंगला राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की राजनीतिक पहचान का भी हिस्सा माना जाता है। सरकार ने हाल ही में एक नया नोटिस जारी कर आवास खाली करने को कहा है, क्योंकि यह बंगला अब पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है।
विवाद के बीच राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार की एनडीए सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो जबरन आवास खाली कराकर दिखाए। वहीं भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि सरकारी आवासों का आवंटन सरकार का विशेषाधिकार है और किसी भी व्यक्ति का किसी खास बंगले पर स्थायी अधिकार नहीं हो सकता। ऐसे में यह मामला अब केवल सरकारी आवास का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बनता जा रहा है।