पटना न्यूज डेस्क: पटना यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ (PUTA) में नई टीम चुनने के लिए आज वोटिंग हो रही है। इस चुनाव में विश्वविद्यालय के शिक्षक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष सहित सात प्रमुख पदों के लिए कुल 25 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए हैं, जबकि कार्यकारिणी समिति के 12 सदस्यों का चयन बिना मुकाबले के पहले ही हो चुका है।
पटना कॉलेज में शाम 3:30 बजे तक होगी वोटिंग
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतदान की प्रक्रिया सुबह 10 बजे पटना कॉलेज के जिम्नेजियम हॉल में शुरू हुई। शिक्षक दोपहर 3:30 बजे तक वोट डाल सकेंगे। इस चुनाव में 400 से ज्यादा पंजीकृत शिक्षक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान पूरा होने के बाद शाम 4 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी। चुनाव अधिकारियों को उम्मीद है कि देर शाम तक सभी सात पदों के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर किसके बीच मुकाबला?
अध्यक्ष पद के लिए चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें सांख्यिकी विभाग के कुमार सत्येंद्र यादव, भौतिकी विभाग के शंकर कुमार, आईपीपीआरएस के शिव सागर प्रसाद और पीएमआईआर की सुप्रिया कृष्णन शामिल हैं।
उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। इनमें एमएमसी की अर्चना जायसवाल, पटना लॉ कॉलेज के सलीम जावेद और वीएमवी के सुषपन प्रसाद सिंह अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
महासचिव और संयुक्त सचिव पद पर भी कड़ा मुकाबला
महासचिव के एक पद के लिए पांच उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें बीएनसी के रसायन विज्ञान विभाग के आशुतोष, सांख्यिकी विभाग के आशुतोष पांडेय, पटना लॉ कॉलेज के वीरेंद्र, पटना ट्रेनिंग कॉलेज के दीप नारायण और साइंस कॉलेज के भूगर्भशास्त्र विभाग के शेखर शामिल हैं।
वहीं, संयुक्त सचिव के दो पदों के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें अनीता कुमारी, प्रेम प्रकाश पंकज, मधु कुमारी गुप्ता, हरिशंकर दास, सूर्यनाथ सिंह, शोभन चक्रवर्ती, रीना कुमारी, जयेंद्र कुमार मोनू, राजीव कुमार और हेमंत कुमार के नाम शामिल हैं।
कोषाध्यक्ष के लिए तीन उम्मीदवार, 12 सदस्य पहले ही चुने गए
कोषाध्यक्ष पद के लिए पटना कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के नकवी अहमद जॉन, पीडब्ल्यूसी के रसायन विभाग की ज्योति चंद्रा और बीएनसी के दर्शनशास्त्र विभाग के मो. जियाउल हसन के बीच मुकाबला है। दूसरी ओर, कार्यकारिणी समिति के सभी 12 सदस्य निर्विरोध चुने जा चुके हैं। अब चुनाव के नतीजों का इंतजार है।
करीब तीन साल बाद हो रहे इस चुनाव में शिक्षकों की समस्याएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रमोशन में देरी, लंबित सेवा लाभ, विश्वविद्यालय और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ महिला शिक्षकों के लिए चाइल्ड केयर लीव (CCL) को प्रभावी ढंग से लागू करने जैसे मुद्दे इस बार चर्चा में हैं।