पटना न्यूज डेस्क: अनंत सिंह प्रयागराज से पटना लौट आए हैं और अब अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने रिश्तेदारों और खास लोगों को शादी के कार्ड बांटने शुरू कर दिए हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार से मुलाकात कर उन्हें भी बेटी की शादी का निमंत्रण दिया।
400 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे थे वाराणसी
अनंत सिंह शुक्रवार शाम करीब 5 बजे 400 गाड़ियों के काफिले के साथ वाराणसी पहुंचे थे। हालांकि, धनतेरस और दिवाली के कारण शहर में भीड़ और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उन्हें डाफी इलाके में ही रोक दिया। अनंत सिंह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) जाकर महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर फूल चढ़ाना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें केवल 5 गाड़ियों के साथ अंदर जाने की अनुमति देने की बात कही। इस पर उन्होंने जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वह इतनी कम गाड़ियों के साथ नहीं चलते हैं। इसके बाद शाम करीब 5:30 बजे पुलिस ने उनके काफिले को प्रयागराज की ओर रवाना कर दिया। इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच बहस भी हुई।
अनंत सिंह सुबह पटना से करीब 100 गाड़ियों के साथ प्रयागराज के लिए निकले थे। रास्ते में उनके समर्थक काफिले से जुड़ते गए और गाड़ियों की संख्या बढ़कर 400 तक पहुंच गई। रात करीब 8 बजे वह प्रयागराज में अपने पुराने दोस्त पप्पू सलमान के घर शादी समारोह में पहुंचे। इसके बाद रात 9 बजे वहां से पटना के लिए रवाना हो गए। बीएचयू छात्र नेता डॉ. सौरव राय के मुताबिक, अनंत सिंह उनके घर भी आने वाले थे और उनकी मां से मुलाकात का कार्यक्रम था। साथ ही उन्हें महामना मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना था। इसके लिए प्रशासन से पहले ही अनुमति मांगी गई थी, लेकिन पांच गाड़ियों की शर्त के कारण पूरा कार्यक्रम रद्द हो गया।
दुलारचंद यादव हत्याकांड पर अनंत सिंह ने दी सफाई
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के सरेंडर करने के आदेश के बीच अनंत सिंह ने दो दिन पहले एक इंटरव्यू में अपना पक्ष रखा था। उन्होंने दावा किया कि जिस समय घटनास्थल पर विवाद हुआ, उनकी गाड़ी वहां से करीब 5 किलोमीटर आगे निकल चुकी थी। उनके मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को खाना खाने के बाद वह समर्थकों के साथ निकले थे। काफिले की कुछ गाड़ियां आगे थीं, जबकि कुछ पीछे चल रही थीं। इसी दौरान उन्हें पीछे विवाद होने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इसके बाद पीछे चल रहे समर्थकों को फोन कर घटना के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी। अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
JDU ने 6 साल के लिए किया था निष्कासित
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 24 अक्टूबर को अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव में उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। इसके अलावा उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ प्रचार किया और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान भी दिए थे।
मोकामा हिंसा में हुई थी दुलारचंद यादव की मौत
30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार के दौरान हिंसा हुई थी। उस समय अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, जबकि दुलारचंद यादव जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए और हुई हिंसा में दुलारचंद यादव की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव जीता था। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर सरेंडर करने का आदेश दिया। पहले उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करना था, लेकिन बेटी की शादी का हवाला देने पर समयसीमा बढ़ाकर 4 दिसंबर कर दी गई।