पटना न्यूज डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस हालिया फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला का सलवार उतारना और उसके स्तन दबाना 'दुष्कर्म के प्रयास' की श्रेणी में नहीं आता। पटना हाई कोर्ट ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध माना था और आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया था।
यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने उठाया। उन्होंने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियां लगातार सामने आ रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों का ध्यान रखना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट को भी मंजूरी दी। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी अदालतें इस हैंडबुक में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। साथ ही राज्यों को पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज करने और चार्जशीट दाखिल करते समय भी इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विस्तृत फैसला भी जारी करेगा। इससे पहले भी शीर्ष अदालत यौन अपराधों से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट की कुछ टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान ले चुकी है। इनमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के वे फैसले भी शामिल हैं, जिनमें दुष्कर्म के प्रयास और दुष्कर्म के मामलों में की गई कुछ टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई थी।