पटना न्यूज डेस्क: पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध निर्माण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आठ हफ्ते की और मोहलत दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर इस समय के अंदर आदेश का पालन नहीं हुआ तो बिहार के मुख्य सचिव और दूसरे संबंधित अधिकारियों को तलब किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि अब इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसा कोई भी नया निर्माण आगे न बढ़ाया जाए, जिससे नदी के पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आती हो। सुनवाई के दौरान बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय ने बताया कि पहले दिए गए आदेश पर कुछ हद तक काम हुआ है, लेकिन बाढ़ क्षेत्र में अभी भी कई अवैध निर्माण हटाए जाने बाकी हैं।
एसडी संजय ने कोर्ट को बताया कि नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ गया था। इससे बाढ़ क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया और अतिक्रमण हटाने का काम मुश्किल हो गया। कोर्ट ने मामले में जुड़े लोगों को यह छूट भी दी कि वे संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज, मंजूरी और निर्माण की अनुमति के कागजात के साथ अपना पक्ष रख सकते हैं। हालांकि, बिना जरूरी अनुमति के किसी भी दावे पर अधिकारियों को विचार नहीं करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
इससे पहले 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना में नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के बाढ़ क्षेत्र से सभी अवैध अतिक्रमण छह हफ्ते में हटाने और 23 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे बढ़ रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को गंभीर समस्या बताया था। यह मामला पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गंगा के बाढ़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हो रहे हैं और संबंधित अधिकारी इस पर जरूरी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।