पटना न्यूज डेस्क: पटना में अब इंदौर की तर्ज पर आधुनिक स्ट्रीट फूड हब विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाने और शहर की स्ट्रीट फूड संस्कृति को व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से पटना नगर निगम ने शहरी विकास एवं आवास विभाग को प्रस्ताव भेजा है। यह परियोजना प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत तैयार की जाएगी, जिसमें लिट्टी-चोखा, चंपारण मटन, खाजा, ठेकुआ और मखाना जैसे स्थानीय स्वाद को प्रमुखता दी जाएगी।
इस फूड हब के लिए शहर में तीन प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है। इनमें जेपी गंगा पथ स्थित दीघा गोलंबर, कोतवाली की खटाल गली और मीठापुर में निर्माणाधीन कॉमन सर्विस सेंटर परिसर शामिल हैं। करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन फूड हब में सड़क किनारे बिखरे ढंग से लगने वाले फूड स्टॉल्स को व्यवस्थित तरीके से स्थापित किया जाएगा, ताकि लोगों को साफ-सुथरा और बेहतर माहौल मिल सके।
योजना के तहत किसी स्थायी निर्माण की जगह आधुनिक अस्थायी ढांचे तैयार किए जाएंगे। यहां भोजन बनाने, स्टोर करने और बेचने के लिए सुरक्षित व सुव्यवस्थित व्यवस्था होगी। लोगों के बैठने के लिए आकर्षक स्पेस, साफ शौचालय, पेयजल, पार्किंग, बेहतर लाइटिंग और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि कम से कम 50 प्रतिशत दुकानों में बिहार के पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय मिठाइयां अनिवार्य रूप से उपलब्ध होंगी, जिससे राज्य की खानपान संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
इस योजना के तहत फूड वेंडर्स को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के तरीके सिखाए जाएंगे। नगर निगम का मानना है कि इससे पटना की स्ट्रीट फूड संस्कृति को नया स्वरूप मिलेगा और स्थानीय व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिलेगी।