पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्हें बिहार न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण के लिए क्यों न भेजा जाए। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार की अदालत ने 10 सितंबर को अग्रिम जमानत से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि न्यायाधीश ने अग्रिम जमानत के मामले में ऐसा आदेश पारित किया, जिसे अदालत ने कानून के मुताबिक गलत बताया और इससे लगा कि वह इस विषय में कानून में हुए हालिया बदलावों से अपडेट नहीं हैं।
मामले में आरोपी ने पहले मधुबनी की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-5 ने अग्रिम जमानत मंजूर या खारिज करने के बजाय आरोपी को चार सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में पेश होकर नियमित जमानत लेने का निर्देश दिया था। इस आदेश में 2024 के नौशाद अंसारी बनाम बिहार राज्य मामले के साथ सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार, सतेंद्र कुमार अंतिल और मोहम्मद असफाक आलम से जुड़े फैसलों का हवाला दिया गया था।
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि उसकी डिवीजन बेंच पहले ही नौशाद अंसारी मामले में दिए गए कानून के सिद्धांत को सही नहीं माना था। अदालत ने एमडी राजा बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित फैसला पर इनक्यूरियम माना जा चुका है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्र अदालत के सामने जब अग्रिम जमानत की अर्जी आती है, तो उसे उसे मंजूर या खारिज करके फैसला करना होता है, केवल अर्जी का निपटारा कर आरोपी को नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट भेजना पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने कहा कि बाद का फैसला न्यायिक अधिकारियों तक पहुंचाया जा चुका था और कानून की पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुआ था, इसके बावजूद संबंधित न्यायाधीश ने पुराने फैसले के आधार पर 16 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि न्यायाधीश को अग्रिम जमानत से जुड़े कानून में हुए विकास की जानकारी नहीं थी और ऐसे आदेशों से मुकदमे में शामिल लोगों को परेशानी हो सकती है। इसी वजह से न्यायिक प्रशिक्षण के लिए बिहार न्यायिक अकादमी भेजे जाने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी और उस दौरान न्यायिक अधिकारी के जवाब पर भी विचार किया जाएगा।