पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी से जुड़े एक मामले में कहा है कि हर बार ऐसे मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत केस दर्ज करना जरूरी नहीं है। जस्टिस अशोक कुमार पांडे की पीठ ने कहा कि अगर कोई दवा केंद्र सरकार की अधिसूचना में तय शर्तों को पूरा करती है, तो उसके मामले में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी भारत कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की और आरोपी को जमानत दे दी।
484 लीटर कफ सिरप की बरामदगी से जुड़ा मामला
यह मामला बिहार के खगड़िया जिले का है, जहां मई 2026 में भारत कुमार को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, एक पिकअप वैन से 484 लीटर कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुआ था। आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल सिर्फ वाहन के पास खड़ा था और उसका न तो गाड़ी से कोई संबंध था और न ही बरामद कफ सिरप से। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी के पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ। वकील ने 14 नवंबर 1985 की केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि सिरप में कोडीन की मात्रा तय सीमा के भीतर थी।
अधिसूचना की शर्तें पूरी होने पर लागू हो सकता है दूसरा कानून
केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, कुछ कोडीन युक्त दवाओं को एनडीपीएस एक्ट के तहत मादक पदार्थ की परिभाषा से छूट मिल सकती है। इसके लिए प्रति खुराक कोडीन की मात्रा 100 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और उसकी सांद्रता 2.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, दवा के चिकित्सीय इस्तेमाल समेत अन्य जरूरी शर्तें पूरी होना भी जरूरी है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि बरामद सिरप में कोडीन की सांद्रता 2.5 प्रतिशत से कम थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित दवा अधिसूचना के तहत छूट की पात्र है, तो उसे सीधे प्रतिबंधित मादक पदार्थ मानकर व्यावसायिक मात्रा के नियम लागू करने के सवाल पर विचार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने जमानत का किया विरोध
बिहार सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 और सुप्रीम कोर्ट के हीरा सिंह बनाम भारत संघ फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया था कि मादक पदार्थ के मिश्रण की मात्रा तय करते समय पूरे मिश्रण का वजन मायने रख सकता है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत व्यावसायिक मात्रा से जुड़े मामलों में जमानत की शर्तें सख्त होती हैं। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित दवा अधिसूचना के तहत मादक पदार्थ की परिभाषा से बाहर आती है, तो व्यावसायिक मात्रा से जुड़े सवाल को उसी आधार पर देखना होगा। अदालत ने भारत कुमार को जमानत देते हुए ऐसे मामलों में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों पर भी विचार करने की बात कही।
हर कोडीन कफ सिरप मामले में नहीं मिलेगी छूट
अदालत की इस टिप्पणी का मतलब यह नहीं है कि कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े हर मामले में एनडीपीएस एक्ट लागू नहीं होगा। जून 2026 में पटना हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने अलग मामले में कहा था कि जरूरी अनुमति के बिना ऐसी दवा का कब्जा रखने या उसे ले जाने पर एनडीपीएस एक्ट के प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसलिए हर मामले में दवा की मात्रा, सरकारी अधिसूचना में तय शर्तों, जरूरी अनुमति और कानून के दूसरे प्रावधानों को ध्यान में रखकर फैसला करना होगा।