पटना न्यूज डेस्क: पटना हाई कोर्ट ने पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा घटाने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और बिना ठोस कारण बताए उनकी ‘वाई प्लस’ सुरक्षा को घटाकर ‘वाई’ श्रेणी में कर दिया, जो मनमाना फैसला था।
जस्टिस जितेंद्र कुमार की अदालत ने 14 मई को दिए आदेश में कहा कि कार्यपालिका के फैसले कानून और तय प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए, न कि अधिकारियों की मनमर्जी से। कोर्ट ने पाया कि पप्पू यादव की सुरक्षा घटाने के लिए राज्य सरकार के पास ऐसा कोई ठोस आधार नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें मिलने वाले खतरे कम हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक पूर्णिया की रिपोर्ट में सिर्फ इतना कहा गया था कि कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली, लेकिन खतरा खत्म होने की बात नहीं कही गई थी।
पप्पू यादव ने अदालत में कहा था कि उन्हें लॉरेंस बिश्नोई गैंग और छोटू यादव गैंग जैसे आपराधिक गिरोहों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। अगस्त 2025 में उनकी सुरक्षा ‘वाई प्लस’ श्रेणी में बढ़ाई गई थी, लेकिन सितंबर 2025 में इसे फिर घटा दिया गया। अदालत ने यह भी माना कि सुरक्षा घटाने से पहले न तो पप्पू यादव की राय ली गई और न ही उन्हें फैसले की जानकारी दी गई।
कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह दोबारा खतरे का आकलन करे, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों और पप्पू यादव दोनों की बात सुनी जाए। इसके बाद कारणों सहित नया आदेश जारी किया जाए। अदालत ने साफ कहा कि प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष प्रक्रिया संविधान का अहम हिस्सा हैं और किसी व्यक्ति के खिलाफ बिना सुनवाई के प्रतिकूल आदेश नहीं दिया जा सकता।