पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) के दो कांस्टेबलों को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी है। दोनों को 2019 में एक साथी कांस्टेबल के समर्थन में की गई गतिविधियों के कारण नौकरी से हटाया गया था। अदालत ने माना कि उन्हें दी गई सजा उनके कथित कदाचार की तुलना में बेहद कठोर थी और विभागीय कार्रवाई में उन्हें उचित सुनवाई का मौका भी नहीं मिला।
मामला 25 फरवरी 2018 का है, जब मेघालय में चुनाव ड्यूटी के दौरान आरपीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट मुकेश चंद त्यागी की कथित तौर पर कांस्टेबल अर्जुन देशवाल ने हत्या कर दी थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर देशवाल के समर्थन में संदेश और पोस्ट वायरल हुए। कांस्टेबल करम जीत ने उसे समर्थन देने के लिए अपने वेतन खाते से भीम ऐप के जरिए 1,000 रुपये भेजे थे, जबकि कमलेश कुमार यादव ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर लोगों से 200-200 रुपये आर्थिक मदद देने की अपील की थी।
विभागीय जांच में दोनों ने अपनी गलती स्वीकार की और बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आई सामग्री से भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर उन्होंने ऐसा किया था। करम जीत ने कहा कि भेजे गए 1,000 रुपये अगले ही दिन उसके खाते में वापस आ गए थे, जबकि कमलेश ने अपनी फेसबुक पोस्ट भी बाद में हटा दी थी। दोनों ने कोई हिंसा, विद्रोह या ड्यूटी में बाधा डालने से इनकार किया और अपनी गलती पर अफसोस जताया। इसके बावजूद 11 जनवरी 2019 को दोनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
जस्टिस हरीश कुमार ने कहा कि दोनों को हटाने की कार्रवाई मनमानी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ थी। अदालत ने यह भी पाया कि इसी मामले में आरोपों का सामना कर रहे कुछ अन्य आरपीएसएफ कर्मियों की सजा अपील के दौरान कम कर दी गई थी और उन्हें दोबारा सेवा में लिया गया था। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी, अपील, पुनर्विचार और दया याचिका पर दिए गए आदेश रद्द करते हुए दोनों कांस्टेबलों को फिर से नौकरी पर रखने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि उन पर उन्हीं कर्मचारियों के समान मामूली सजा लागू की जाए, जिन्हें समान परिस्थितियों में कम दंड दिया गया था।