पटना न्यूज डेस्क: बिहार के सहरसा में मिड डे मील खाने के बाद 189 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले पर पटना हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। बताया गया कि 7 मई 2026 को बच्चों को परोसे गए भोजन में कथित तौर पर सांप मिलने के बाद यह घटना हुई। खाना खाने के कुछ ही समय बाद कई बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने लगी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
यह भोजन भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति नाम की एजेंसी द्वारा सप्लाई किया गया था, जिसे सरकार की ओर से मिड डे मील योजना के तहत जिम्मेदारी दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि घटना बेहद चिंताजनक है और बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
फॉरेंसिक जांच को लेकर भी अदालत ने कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पाया कि जांच के लिए भेजे गए खाने के नमूनों को अलग-अलग जगहों पर कभी दाल, कभी खिचड़ी और कभी सब्जी बताया गया। इतना ही नहीं, सैंपल लैब तक पहुंचाने में सात दिन की देरी भी हुई। अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि आखिर नमूनों को किस प्रक्रिया के तहत इकट्ठा और टेस्ट किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मिड डे मील सप्लाई करने वाली एजेंसी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बिहार सरकार के एमडीएम/पीएम पोषण निदेशालय के निदेशक को यह तय करने के लिए कहा गया है कि जांच पूरी होने तक एजेंसी को काम जारी रखने दिया जाए या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जून 2026 को होगी।