पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की ओर से एक भू-स्वामी को भेजे गए अधूरे और खाली नोटिस को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने नोटिस जारी करने के तरीके को "गैर-जिम्मेदाराना" बताते हुए एनएचएआई पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही कहा कि यह राशि संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के बाद उससे वसूली जा सकती है।
न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकल पीठ ने एनएचएआई को कानून के अनुसार नया और सही नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस जारी होने के बाद एनएचएआई, राज्य प्रशासन और याचिकाकर्ता मिलकर उस जमीन का सीमांकन करें, जिसका अधिग्रहण नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा था कि एनएच-527सी (मझौली-चौरौत स्टेट हाईवे) परियोजना के लिए उसकी कुछ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन बची हुई जमीन पर उसने निर्माण कराया था। बाद में उसे एनएचएआई की ओर से कार्रवाई की चेतावनी वाला नोटिस मिला, जिसमें न तो पत्र संख्या थी, न तारीख, न जमीन का विवरण और न ही यह बताया गया था कि नोटिस किस भूमि से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और एनएचएआई दोनों ने स्वीकार किया कि इस तरह के पत्र को वैध नोटिस नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नोटिस देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे बिना जरूरी जानकारी भरे ही कार्यालय के कर्मचारियों ने जारी कर दिया हो। उसमें सिर्फ अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर थे, बाकी सभी कॉलम खाली थे।
कोर्ट ने ऐसे नोटिस को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही एनएचएआई को नया नोटिस जारी करने और उसके बाद याचिकाकर्ता की गैर-अधिग्रहित जमीन का संयुक्त सीमांकन कराने का निर्देश दिया।
मानसिक परेशानी को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मुआवजे के तौर पर 5,000 रुपये देने का आदेश दिया। यह राशि चार सप्ताह के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदार अधिकारी की पहचान होने के बाद एनएचएआई उससे यह रकम वसूल सकती है।