पटना न्यूज डेस्क: बिहार के जहानाबाद स्थित मौर्यकालीन बराबर गुफाओं की बदहाल स्थिति और वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी पर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने 21 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान कहा कि तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का यह ऐतिहासिक स्थल दुनिया में अपनी तरह का खास महत्व रखता है, फिर भी यहां देखरेख की स्थिति बेहद खराब है।
यह मामला 2024-25 के बराबर श्रावणी मेले की नीलामी में सफल बोलीदाता राजबल्लभ प्रसाद की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने टेंडर की रकम जमा करने में देरी पर लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मेले से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल इलाके की सफाई, सुरक्षा और स्थायी सुविधाएं विकसित करने में किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जिला प्रशासन की दिलचस्पी राजस्व वसूलने तक सीमित नजर आती है।
कोर्ट ने बराबर गुफाओं के आसपास गंदगी, कूड़े के ढेर, साफ पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने महाराष्ट्र की अजंता-एलोरा गुफाओं और मध्य प्रदेश के सांची स्तूप का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों जगहों पर पर्यटन सुविधाओं और रखरखाव पर ध्यान दिया गया है, जबकि बराबर गुफाओं की स्थिति अलग है। वन विभाग को भी गुफाओं के आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र और पुराने डाक बंगले की बदहाल स्थिति को लेकर फटकार लगाई गई।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ श्रावणी मेले के दौरान टैंकर, अस्थायी शौचालय या मोबाइल मेडिकल कैंप जैसी अस्थायी व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। जहानाबाद के डीएम को पिछले पांच साल में मेले से हुई आय और विकास कार्यों पर खर्च का पूरा रिकॉर्ड देने का निर्देश दिया गया है। एसपी से पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है, खासकर 12 अगस्त 2024 की भगदड़ को देखते हुए, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने छह हफ्ते में स्थायी निर्माण, साफ पानी, स्वच्छता, सुरक्षा और हरियाली को लेकर विस्तृत योजना मांगी है। साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष समिति साइट का निरीक्षण कर कोर्ट को स्वतंत्र रिपोर्ट देगी। मामले में 28 सितंबर को अनुपालन रिपोर्ट पर सुनवाई होगी, जबकि अगली विस्तृत सुनवाई 2 नवंबर को तय है।