पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने बोधगया के मठों और मोनास्ट्री के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर दायर जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि जनहित याचिका का इस्तेमाल ऐसे विवाद के लिए नहीं किया जा सकता, जिसका असल संबंध किसी खास संस्था या एसोसिएशन के अपने हितों से हो। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ राहत की मांग को कानूनी नियमों के पालन से जोड़ देने से कोई मामला जनहित याचिका नहीं बन जाता।
यह याचिका बोधगया होटल एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि बोधगया में कई मठों और मोनास्ट्री में नियमों के खिलाफ निर्माण हुए हैं और कुछ जगहों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि महाबोधि मंदिर के आसपास स्टार कैटेगरी होटल जैसी सुविधाओं वाली मोनास्ट्री बन गई हैं, जिससे बोधगया के धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल पर असर पड़ रहा है और सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि कथित अवैध निर्माण के मामलों की जांच पहले ही संबंधित स्थानीय अधिकारियों की ओर से की जा चुकी है। कुछ मोनास्ट्री को नोटिस भी दिए गए थे। जांच में पांच मोनास्ट्री के निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक पाए गए, जबकि कुछ अन्य जगहों पर स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण मिला और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की गई। वहीं, मठों और मोनास्ट्री की ओर से कहा गया कि वे बौद्ध धर्म की अलग-अलग परंपराओं से जुड़े धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थान हैं। उनके यहां श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और बोधगया आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था उनकी धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा है, इसे केवल इस आधार पर व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने दोनों रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इससे सक्षम अधिकारियों के उस अधिकार पर कोई रोक नहीं लगेगी, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मठों और मोनास्ट्री में सभी निर्माण नगर निकाय कानून, बिल्डिंग बायलॉज, बिल्डिंग रूल्स, लैंड-यूज नियमों और अन्य कानूनी प्रावधानों के मुताबिक हों। साथ ही, मठों को अपने परिसर में ठहरने या रहने की सुविधा पाने वाले लोगों का रोजाना रजिस्टर रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के सामने पेश करने का निर्देश दिया गया है।