पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने नालंदा के एक अस्पताल से नवजात के कथित तौर पर गायब होने के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से संवेदनशीलता की कमी दिखाई दी। कोर्ट के मुताबिक, घटना के करीब दो महीने बाद एफआईआर दर्ज किए जाने का आरोप है।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की डिवीजन बेंच ने 15 सितंबर को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ नालंदा के जिलाधिकारी के असंवेदनशील रवैये का उदाहरण है। अदालत के अनुसार, एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर भी सवाल उठते हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार में लापता बच्चों से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। आदेश में कहा गया कि हाल ही में राज्य स्तरीय किशोर न्याय सम्मेलन में बिहार के डीजीपी ने बताया था कि एक साल में 14,500 से ज्यादा बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में थानों की जिम्मेदारी संवेदनशील अधिकारियों को देने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अदालत ने सुझाव दिया कि पुलिस थानों में अधिकारियों की तैनाती से पहले उनके व्यवहार और संवेदनशीलता को परखा जाना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों के लापता होने जैसे मामलों में पुलिस अधिकारी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करें। मामले में अदालत ने पुलिस और प्रशासन के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए आगे की कार्रवाई पर भी नजर बनाए रखी।