पटना न्यूज डेस्क: पटना में जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच अब कई लोग शहर से बाहर पुनपुन, फतुहा, संपतचक और गौरीचक जैसे इलाकों में सस्ते प्लॉट तलाश रहे हैं। इन जगहों पर कम कीमत में जमीन मिलने के कारण लोग मकान भी बना रहे हैं, लेकिन बारिश और बाढ़ के मौसम में यही जमीन बड़ी परेशानी की वजह बन सकती है। कुछ निचले इलाकों में पानी 10 से 15 फीट तक पहुंचने की बात सामने आ रही है, जिससे घर और प्लॉट दोनों डूबने का खतरा रहता है।
इसी बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पानी में डूबा हुआ एक मकान दिखाई दे रहा है। मकान के पास ‘उदय कुमार सिंह’ के नाम का बोर्ड लगा है। वीडियो बनाने वाला युवक बताता है कि बाढ़ आने से पहले वह लोग यहां जमीन का रेट पता करने आए थे। बोर्ड के पास मौजूद जमीन की कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई गई। युवक का कहना है कि सड़क किनारे जमीन लेने पर भी यहां से नीचे उतरने की सही जगह नहीं है और बाढ़ के समय करीब 10 फीट तक पानी भर जाता है।
वीडियो में युवक यह सवाल उठाता है कि जब इलाके में इतना पानी भर रहा है तो 20-25 लाख रुपये कट्ठा खर्च करके यहां कौन मकान बनाएगा। उसका कहना है कि अगर किसी को यहां मुफ्त में भी घर बनाने के लिए जमीन मिल जाए, तब भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वह सौदा महंगा पड़ सकता है। यानी सिर्फ जमीन की कीमत कम होना ही काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि बारिश और बाढ़ के दौरान उस जमीन की स्थिति क्या रहती है।
पटना के गंगा किनारे और निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या नई नहीं है। दीघा के नकटा दियारा, कुर्जी, मनेर के अलावा संपतचक और गौरीचक के कुछ निचले हिस्सों में भी लोगों को बारिश और बढ़ते जलस्तर के दौरान परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्लॉट खरीदने से पहले जमीन की ऊंचाई, पुराने जलभराव का रिकॉर्ड, आसपास की जलनिकासी और स्थानीय लोगों से पिछले सालों की बाढ़ की स्थिति जरूर पता करनी चाहिए। केवल सस्ते दाम देखकर जमीन खरीदना बाद में भारी नुकसान का कारण बन सकता है।