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पटना के डॉक्टर एजाज अली आज भी लेते हैं सिर्फ 10 रुपये फीस, रोज 100 से ज्यादा मरीजों का करते हैं इलाज

Photo Source : Google

Posted On:Wednesday, September 30, 2026

पटना न्यूज डेस्क: पटना के बिखना पहाड़ी इलाके में डॉक्टर एजाज अली का अस्पताल बाकी अस्पतालों से थोड़ा अलग नजर आता है। यहां किसी बड़े केबिन में बैठकर मरीज देखने के बजाय डॉक्टर अली अक्सर कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर खुले आंगन में प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठते हैं और मरीजों से मिलते हैं। सबसे खास बात उनकी फीस है, जो सिर्फ 10 रुपये है और उन्होंने इसे कई दशकों से नहीं बढ़ाया है। डॉक्टर अली 1984 से पटना में प्रैक्टिस कर रहे हैं और 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना 100 से ज्यादा मरीज देखते हैं और करीब 7-8 सर्जरी करते हैं। बिहार के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग इलाज के लिए उनके पास पहुंचते हैं।

कम फीस का असर सिर्फ डॉक्टर से मिलने तक सीमित नहीं है। उनके अस्पताल में अपेंडिक्स की सर्जरी के लिए दवाइयों समेत करीब 17 हजार रुपये और पित्त की पथरी के ऑपरेशन के लिए करीब 11 हजार रुपये खर्च आता है। कुछ मामलों में सर्जरी की फीस माफ भी कर दी जाती है, जबकि आर्थिक परेशानी वाले मरीजों को किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाती है। डॉक्टर अली से जब पूछा गया कि उन्होंने अपनी कंसल्टेशन फीस सिर्फ 10 रुपये क्यों रखी, तो उन्होंने अपनी गरीबी के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने आसपास गरीबी देखी है और उनकी मां ने भी उन्हें कुछ खास सीख दी थी। वह कोशिश करते हैं कि बाहर से आने वाले मरीजों का उसी दिन इलाज हो जाए, ताकि उन्हें दोबारा आने के लिए यात्रा, खाना और रहने पर अतिरिक्त पैसे खर्च न करने पड़ें।

1958 में एक लोअर-मिडिल-क्लास परिवार में जन्मे डॉक्टर एजाज अली 10 भाई-बहनों में से एक हैं। उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से मेडिकल की पढ़ाई की और बाद में सर्जरी में मास्टर्स किया। चिकित्सा के साथ उनका सार्वजनिक जीवन भी रहा है। वह मार्च 2008 से जुलाई 2010 तक बिहार से राज्यसभा सांसद रहे। राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनके एमबीबीएस, एमएस और 20 मार्च 2008 से 7 जुलाई 2010 तक सदस्य रहने की जानकारी दर्ज है।

लंबे मेडिकल करियर के बावजूद मरीजों के लिए उनकी सोच आज भी वही है। डॉक्टर अली दूसरे डॉक्टरों को सलाह देते हैं कि इलाज शुरू करने से पहले मरीज की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और गैर-जरूरी टेस्ट या महंगी दवाइयां नहीं लिखनी चाहिए। उनकी बेटी डॉ. सुरैया अंजुम, जो गायनेकोलॉजिस्ट हैं, और दूसरी बेटी डॉ. नगमा अंजुम, जो पैथोलॉजिस्ट हैं, भी मेडिकल प्रोफेशन में हैं। उनकी दिवंगत पत्नी भी डॉक्टर थीं और सिर्फ 10 रुपये फीस लेती थीं। परिवार में अब भी कम फीस पर इलाज देने की सोच जारी है। डॉक्टर अली का बेटा 100 रुपये और बेटी डॉ. सुरैया अंजुम 50 रुपये कंसल्टेशन फीस लेती हैं।


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