पटना न्यूज डेस्क: पटना में आज देश का पहला विक्टिम राइट्स सेंटर शुरू किया जाएगा। इसका उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में करेंगे। यह बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी का पायलट प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद अपराध के पीड़ितों को एक ही जगह पर कानूनी और दूसरी जरूरी मदद उपलब्ध कराना है।
सेंटर में पीड़ित को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने और बार-बार अपनी पूरी कहानी बताने की जरूरत नहीं होगी। यहां पहुंचते ही केस दर्ज किया जाएगा और एक विक्टिम केस नंबर दिया जाएगा। इसके बाद उसी केस की एक रिकॉर्ड फाइल रखी जाएगी और पीड़ित की कानूनी, मेडिकल, आर्थिक, मानसिक, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी जरूरतों का आकलन किया जाएगा। एफआईआर से लेकर जमानत, ट्रायल, सजा और अपील तक कानूनी मदद दी जाएगी। मुआवजे के आवेदन, इमरजेंसी इलाज और गवाहों की सुरक्षा में भी सहायता मिलेगी।
सेंटर में काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक मदद और कोर्ट में साथ देने की सुविधा भी होगी। जिन मामलों में लंबे समय तक मदद की जरूरत होगी, वहां पीड़ितों को आश्रय, शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग, रोजगार के अवसर और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद की जाएगी। हर सेवा के लिए समय तय रहेगा और 48 घंटे के अंदर पैनल वकील नियुक्त करने का प्रावधान है। सेंटर खुद मुआवजा नहीं देगा, बल्कि पुलिस, अस्पताल, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और दूसरे सरकारी विभागों के साथ मिलकर पीड़ित तक जरूरी मदद पहुंचाएगा।
इस प्रोजेक्ट में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया है जिन्हें सेंटर ने ‘विक्टिम्स ऑफ सर्कम्स्टेंसेज’ यानी परिस्थितियों के शिकार लोगों के तौर पर चिन्हित किया है। इनमें लंबे समय से अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बंद परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य के परिवार और कई साल हिरासत में रहने के बाद बरी हुए लोगों के परिवार शामिल हैं। यह पायलट प्रोजेक्ट शुरुआत में पटना जिले में 12 महीने चलेगा और इसके बाद इसके कामकाज का आकलन कर दूसरे जिलों में विस्तार पर फैसला लिया जाएगा। सेंटर का प्रस्ताव अधिवक्ता शमा सिन्हा ने दिया है और इसे बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के मौजूदा संसाधनों से चलाया जाएगा। 26 सितंबर के कार्यक्रम में ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन भी शुरू होगी, मल्टी यूटिलिटी व्हीकल्स को हरी झंडी दिखाई जाएगी और सेंटर की योजना व स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर पर आधारित प्रकाशन जारी किया जाएगा।