पटना न्यूज डेस्क: पटना जिले के अथमलगोला अंचल में गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ का पानी घरों में घुसने से करीब 8 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने परिवार और मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए सबनीमा पुल, स्कूलों और बाजारों में शरण लेने को मजबूर हैं।
ग्रामीण इलाकों में कई घर पूरी तरह पानी से घिर चुके हैं। ऐसे में लोगों के सामने खाने-पीने के सामान, साफ पानी और मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अंदरूनी और जलमग्न इलाकों तक राहत सामग्री और नाव नहीं पहुंचने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।
वार्ड 8, 9 और 10 में हालात ज्यादा खराब
स्थानीय लोगों के मुताबिक मुख्य सड़कों के आसपास प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था नजर आ रही है, लेकिन दूर के इलाकों में स्थिति काफी खराब है। खासकर वार्ड नंबर 8, 9 और 10 में सैकड़ों परिवार पानी से घिरे घरों में फंसे हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन इलाकों में अभी तक पर्याप्त नाव और खाद्य सामग्री नहीं पहुंची है।
बाढ़ पीड़ित दिनेश कुमार ने बताया कि कई परिवारों के घरों में खाने का सामान खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने प्रशासन से सूखा राशन, पीने का पानी और रहने के लिए त्रिपाल उपलब्ध कराने की मांग की है।
मवेशियों के चारे का भी संकट
बाढ़ का असर सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं है। मवेशियों के सामने भी चारे का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार ज्यादातर चारा पानी में डूब चुका है। अगर पशु बीमार पड़ते हैं तो उनके इलाज की सुविधा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलमग्न इलाकों में फंसे लोगों तक जल्द सूखा राशन, दवाइयां, पीने का पानी और मवेशियों के लिए चारा नहीं पहुंचाया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
प्रशासन का दावा- हर परिवार तक पहुंचेगी राहत
वहीं, प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम तेज कर दिया गया है। अनुमंडलाधिकारी कृष्णा जोशी के नेतृत्व में अथमलगोला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जुटा हुआ है। अंचलाधिकारी अशोक कुमार ने भी भरोसा दिलाया है कि बाढ़ से प्रभावित हर परिवार तक राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी।
प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रही हैं और जरूरत के हिसाब से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।