पटना न्यूज डेस्क: पटना के पीएमसीएच में अब डॉग बाइट यानी कुत्ते के काटने पर दी जाने वाली वैक्सीन का तरीका बदल गया है। अब तक जो वैक्सीन मांसपेशियों (इंट्रामस्क्यूलर) में दी जाती थी, वो अब त्वचा के नीचे (इंट्राडर्मल) दी जाएगी। इस नई तकनीक से मरीज को कम दर्द होगा और वैक्सीन की बचत भी होगी। पहले मरीज को एक डोज में 0.5 एमएल वैक्सीन पांच बार दी जाती थी, जबकि अब 0.2 एमएल डोज चार बार दी जाएगी। इस नई पद्धति की शुरुआत पीएमसीएच के पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कृष्ण ने अधीक्षक और प्राचार्य की मौजूदगी में की।
डॉ. अजय कृष्ण ने बताया कि यह वही तकनीक है, जो अब तक अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक अपनाई जा चुकी थी। अब बिहार में भी इसे लागू किया गया है। इस नए तरीके से वैक्सीन की खपत में बड़ी बचत होगी। पहले जहां एक मरीज को कुल 2.5 एमएल वैक्सीन दी जाती थी, अब केवल 0.8 एमएल ही पर्याप्त होगी। इससे हर मरीज पर करीब 68 प्रतिशत वैक्सीन की बचत संभव है।
नई पद्धति में मरीजों को कम इंजेक्शन लगेंगे और दर्द भी बहुत कम होगा। डॉक्टर ने बताया कि जांचों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस नए तरीके से दी गई वैक्सीन से रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले जैसी ही मजबूत बनी रहती है। यानी सुरक्षा में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि मरीजों के लिए प्रक्रिया आसान और आरामदायक हो जाएगी।
पीएमसीएच में रोजाना करीब 100 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी और बरसात के मौसम में इसके केस बढ़ जाते हैं, क्योंकि दियारा इलाकों में सियारों की मांद में पानी भर जाने से वे बाहर निकल आते हैं और काटने की घटनाएं बढ़ती हैं। नई तकनीक से अब वैक्सीन की कमी की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी।