पटना न्यूज डेस्क: सोमवार को पटना में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और उससे जुड़े संगठनों ने अलग-अलग मांगों को लेकर लोक भवन की ओर मार्च किया। प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन, बिहार महिला समाज, बिहार स्टेट किसान सभा, भारतीय खेत मजदूर यूनियन, एटक समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रद्द करने की मांग शामिल थी। इसके अलावा वक्फ संशोधन कानून वापस लेने, मनरेगा में 200 दिनों के रोजगार की गारंटी और न्यूनतम मजदूरी लागू करने, चार लेबर कोड वापस लेने और सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी रखी गई। कृषि से जुड़े मुद्दों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, फसल बीमा और किसानों की कर्जमाफी समेत कई मांगें ज्ञापन में शामिल थीं। SIR को लेकर चुनाव आयोग ने हाल में अपने फैसलों को लेकर स्पष्टीकरण भी जारी किया है और कहा है कि संबंधित आदेशों को आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।
मार्च के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की थी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने के लिए बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कार्रवाई की। पटना में इस प्रदर्शन को देखते हुए जेपी गोलंबर और डाकबंगला इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
इसी बीच बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के छात्रों ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने शैक्षणिक सत्र में देरी और संस्थान के कामकाज में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी छात्रों के प्रदर्शन में पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए। उनके मुताबिक, सत्र में देरी, ज्यादा परीक्षा फीस और बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।