पटना न्यूज डेस्क: पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई खरीदार संपत्ति बिक्री समझौते में तय अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता है, तो वह न तो अनुबंध के विशेष निष्पादन (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस) की मांग कर सकता है और न ही समझौते की शर्तों के विपरीत पूरी राशि और अतिरिक्त मुआवजा पाने का हकदार है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए खरीदार को सीमित राहत देने का फैसला सुनाया।
मामला वर्ष 2010 में हुए एक संपत्ति बिक्री समझौते से जुड़ा था, जिसकी कुल कीमत 1.55 करोड़ रुपये तय की गई थी। खरीदार उमेश कुमार साहू ने दावा किया था कि उन्होंने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन विक्रेता ने बिक्री विलेख निष्पादित नहीं किया। दूसरी ओर, विक्रेता का कहना था कि खरीदार ने तय समय पर भुगतान नहीं किया, जिसके कारण सौदा रद्द करना पड़ा। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि खरीदार ने निर्धारित किस्तों का भुगतान नहीं किया और अपनी तत्परता एवं इच्छा साबित करने में भी विफल रहा।
हाईकोर्ट ने कहा कि समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि यदि खरीदार भुगतान करने में चूक करता है, तो विक्रेता अग्रिम राशि का 10 प्रतिशत काटकर शेष रकम वापस करेगा। अदालत ने माना कि खरीदार ने अनुबंध का पालन नहीं किया, इसलिए उसे संपत्ति पर अधिकार देने या अतिरिक्त मुआवजा देने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत द्वारा पूरी राशि वापस करने और 5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश उसके अपने निष्कर्षों के विपरीत था।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि विक्रेता ने अब तक शेष धनराशि वापस नहीं की थी। इसलिए न्यायालय ने निर्देश दिया कि अग्रिम राशि में से 10 प्रतिशत कटौती के बाद 38.97 लाख रुपये खरीदार को लौटाए जाएं। साथ ही इस राशि पर 23 दिसंबर 2010 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो महीने के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो उसके बाद 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से दंडात्मक ब्याज देना होगा।