पटना न्यूज डेस्क: बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस समय तीन बड़ी खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। शिक्षा विभाग की नई सख्ती से लेकर एक बड़े ठेकेदार की गिरफ्तारी और सरकारी कर्मचारियों के लिए पर्यटन से जुड़ा एक अनोखा आदेश इस समय सुर्खियों में है।
1. अवैध मदरसों और संस्कृत विद्यालयों पर कसेगा शिकंजा
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार शिक्षा विभाग ने राज्यभर में बिना मान्यता के चल रहे और फर्जी मदरसों तथा संस्कृत विद्यालयों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
तुरंत बंद करने का आदेश: शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से ऐसी संस्थाओं की व्यापक समीक्षा रिपोर्ट मांगी है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वैध मान्यता के बिना चल रहे किसी भी मदरसे या संस्कृत विद्यालय को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। जिलों से रिपोर्ट मिलते ही विभाग इनके बंद करने का अंतिम आदेश जारी करेगा।
कोई भेदभाव नहीं: हालांकि, शिक्षा मंत्री ने यह साफ कर दिया है कि इस कार्रवाई में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार वैध रूप से संचालित होने वाले मदरसों और संस्कृत स्कूलों, दोनों को बढ़ावा दे रही है और यह कार्रवाई केवल अवैध और फर्जी संस्थानों के खिलाफ है।
2. महाठग की गिरफ्तारी से आईएएस (IAS) लॉबी में हड़कंप
बिहार के प्रशासनिक हलकों में एक विवादित ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा उर्फ 'ऋषु श्री' की गिरफ्तारी के बाद से भारी घबराहट का माहौल है।
ब्यूरोक्रेट्स से करीबी रिश्ते: करीब एक साल से फरार चल रहे 39 वर्षीय ऋषु श्री को इस हफ्ते स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दबोच लिया। ऋषु के कई सेवारत आईएएस अधिकारियों के साथ बेहद करीबी संबंध रहे हैं।
विदेशी दौरों और काली कमाई का राज: जांच एजेंसियों को शक है कि ऋषु श्री ने देश और विदेशों (ऑफशोर हेवन) में कई नौकरशाहों के काले धन का 'वित्तीय प्रबंधन' कर करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाई है। कई आईएएस अधिकारियों को डर है कि पूछताछ के दौरान ऋषु उनके उन विदेशी दौरों और गुप्त संपत्तियों के राज न उगल दे, जिसका इंतजाम उसी ने किया था।
3. सरकारी कर्मचारियों के लिए पर्यटन यात्रा अनिवार्य; कुंवारे असमंजस में
बिहार सरकार के एक नए तुगलकी या कहें तो अनोखे निर्देश ने सरकारी कर्मचारियों के बीच खलबली मचा दी है, जबकि उनके परिवार इस फैसले से बेहद खुश हैं।
3 महीने में एक बार टूर जरूरी: नए निर्देश के मुताबिक, अब राज्य सरकार के प्रत्येक कर्मचारी के लिए हर तीन महीने में एक बार अपने परिवार के साथ बिहार के किसी पर्यटन स्थल पर दो दिन और दो रात बिताना अनिवार्य कर दिया गया है। यात्रा पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सरकार को एक फीडबैक रिपोर्ट भी भेजनी होगी। इसके लिए शुक्रवार और शनिवार के दिनों को प्राथमिकता दी गई है।
बैचलर्स की दुविधा: इस आदेश ने शादीशुदा कर्मचारियों के परिवारों में तो खुशी की लहर ला दी है, लेकिन कुंवारे (बैचलर) कर्मचारी इस बात को लेकर भारी असमंजस में हैं कि वे क्या करें। सरकार पर तंज कसते हुए एक युवा अधिकारी ने कहा, "इस निर्देश में कुंवारों के लिए कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई है। क्या हमें भी इस सुविधा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी या नहीं, यह साफ नहीं है।"