पटना न्यूज डेस्क: बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग इलाके से एक विचलित कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा पिछले तीन दिनों से लापता थी, जिसे शनिवार सुबह गंभीर और अचेत अवस्था में एक ऑटो से बरामद किया गया। पीड़ित परिजनों ने खुद मुस्तैदी दिखाते हुए तारामंडल के पास से संदिग्ध ऑटो का पीछा किया और मंदिरी नाले के समीप गाड़ी को घेरकर आरोपी चालक को रंगे हाथों दबोच लिया। पीड़िता की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत इलाज के लिए न्यू गार्डिनर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पकड़े गए आरोपी की पहचान वैशाली के रहने वाले 21 वर्षीय मोहम्मद शमशाद आलम के रूप में हुई है, जो गर्दनीबाग में ही किराए का कमरा लेकर रहता था। परिजनों ने पुलिस के सामने आरोपी के उस शातिर तौर-तरीके का पर्दाफाश किया, जिसके तहत वह अपनी पहचान छिपाता था। आरोप है कि शमशाद पहले से ही शादीशुदा है और उसकी आठ महीने की एक बेटी भी है, लेकिन वह अपने व्हाट्सएप (WhatsApp) पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर (DP) लगाकर दूसरे समुदाय की नाबालिग लड़कियों को गुमराह करता था और उन्हें अपने झांसे में लेता था।
घटना की खौफनाक परतें तब खुलीं जब यह बात सामने आई कि आरोपी पिछले तीन दिनों से छात्रा को बंधक बनाकर अपने ऑटो में ही इधर-उधर घुमाता रहा और इस दौरान उसने बच्ची के साथ लगातार दुष्कर्म (बलात्कार) किया। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण जब नाबालिग की तबीयत बेहद खराब हो गई, तो आरोपी उसे डॉक्टर को दिखाने के बहाने अस्पताल ले जा रहा था, तभी सतर्क परिजनों की नजर उस पर पड़ गई। पूछताछ में आरोपी ने यह अजीबोगरीब दावा भी किया कि उसने मैनपुरा के एक मंदिर में पीड़िता से शादी की थी, और चूंकि घर पर उसकी पहली पत्नी रहती थी, इसलिए वह बच्ची को अपने ऑटो में ही छिपाकर रखने को मजबूर था।
सचिवालय डीएसपी डॉ. अनु कुमारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 4 जुलाई को गर्दनीबाग थाने में अपहरण की प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद से ही पुलिस तकनीकी और मानवीय इनपुट के जरिए छात्रा की तलाश में जुटी थी। कोतवाली और गर्दनीबाग पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से नाबालिग को सकुशल मुक्त कराकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके से साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल (FSL) की फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है और पीड़िता के आधिकारिक बयान व मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पोक्सो (POCSO) एक्ट सहित अन्य कड़ी कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।