पटना न्यूज डेस्क: झारखंड उत्पाद विभाग सिपाही भर्ती परीक्षा में सेंधमारी की कोशिश करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरी साजिश के पीछे बिहार के परीक्षा माफियाओं का हाथ बताया जा रहा है। रविवार को झारखंड के आठ जिलों में 370 केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित हुई थी। हालांकि, माफिया पेपर लीक करने में तो कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने अभ्यर्थियों को झांसा देकर करोड़ों की ठगी जरूर कर ली।
इस मामले में रांची पुलिस ने मुख्य आरोपी अतुल वत्स को गिरफ्तार किया है, जो पिछले छह साल से पटना पुलिस की फाइलों में 'फरार' चल रहा था। अतुल के साथ गया का गौरव और हरियाणा का मोहित भी इस साजिश में शामिल हैं। पुलिस ने परीक्षा के दौरान 159 अभ्यर्थियों को भी हिरासत में लिया है, जिनमें से कई बिहार के रहने वाले हैं। अतुल मूल रूप से जहानाबाद का है और वह पटना के बुद्धा कॉलोनी (2020) और दानापुर (2022) थानों में दर्ज पेपर लीक मामलों में भी मुख्य आरोपी रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अतुल अपना सिंडिकेट बिहार के माफियाओं के दम पर चला रहा था। झारखंड के कुछ स्थानीय माफिया भी इस खेल में शामिल होना चाहते थे, लेकिन अतुल ने उन्हें किनारे कर दिया। इसी आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई के कारण इस पूरी साजिश का समय रहते भंडाफोड़ हो गया। अतुल वत्स का नाम विशाल चौरसिया और बिजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े माफियाओं के साथ जुड़ा हुआ है, जो कई राज्यों में संगठित रूप से पेपर लीक का गिरोह चलाते हैं।
इस गिरफ्तारी के बाद कानूनी विशेषज्ञों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रभात भारद्वाज का कहना है कि इतने बड़े संगठित गिरोह के बावजूद इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 112 (संगठित अपराध) के तहत मामला दर्ज नहीं किया गया, जो कि पुलिस मुख्यालय के निर्देशों का उल्लंघन है। फिलहाल, रांची और पटना पुलिस इस सिंडिकेट के अन्य नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।