पटना न्यूज डेस्क: बिहार में इन दिनों अपराधियों के खिलाफ पुलिस का कड़ा शिकंजा देखने को मिल रहा है, जहां लगभग हर दिन मुठभेड़ और 'हाफ एनकाउंटर' की खबरें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में ताजा मामला किशनगंज जिले के सदर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां फरीगोला रेलवे फाटक के पास चौहान बस्ती में पुलिस और बाइक चोर गिरोह के बीच भीषण मुठभेड़ हो गई। इस गोलीबारी में एक शातिर बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गया, जबकि अपराधियों का मुकाबला करते हुए दो पुलिस अधिकारी भी चोटिल हुए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि एक अंतरराज्यीय गिरोह के बदमाश किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के मकसद से चौहान बस्ती के पास इकट्ठा हुए हैं। इस इनपुट के आधार पर जब पुलिस की तकनीकी टीम और स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो बदमाश भागने की फिराक में पुलिस टीम पर फायरिंग करने लगे। आत्मरक्षार्थ में पुलिस की तरफ से की गई जवाबी फायरिंग में कटिहार जिले के रौतारा निवासी बदमाश पवन कुमार उर्फ चिंटू के पैर में गोली लगी। इस साहसिक कार्रवाई के दौरान सदर थाना के सब-इंस्पेक्टर (SI) नीतीश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि डीआईओ प्रभारी इंस्पेक्टर मुश्ताक आलम को भी आंशिक चोटें आईं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएम विशाल राज, एसपी संतोष कुमार और एसडीपीओ वन खुशरू सिराज भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। घायल पुलिसकर्मियों और बदमाश को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से बदमाशों की एक बाइक, एक पिस्तौल और चले हुए कारतूस के खोखे बरामद किए हैं। एसपी संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने पूरी कार्रवाई आत्मरक्षा में की है और गिरोह के अन्य सदस्यों को लेकर आगे की कानूनी तफ्तीश जारी है।
गौरतलब है कि बिहार पुलिस इस हफ्ते अपराधियों पर लगातार कहर बनकर टूट रही है और यह राज्य में लगातार चौथा एनकाउंटर है। इससे पहले बुधवार को समस्तीपुर में सीएसपी लूट के आरोपी प्रिंस को पुलिस ने मुठभेड़ में गोली मारी थी। वहीं मंगलवार को पटना में 27 लाख की कैश वैन लूट के सरगना नीतीश कुमार और सोमवार को ट्रांसपोर्ट नगर में शिक्षक से लूट के आरोपी संदीप उर्फ बादल का भी पुलिस ने हाफ एनकाउंटर कर पैर में गोली मारी थी। सीवान जिले में भी सोमवार को ही ज्वेलरी लूटकांड के आरोपी अंकित सिंह को पुलिस मुठभेड़ के बाद दबोचा गया था, जिससे साफ है कि सूबे में अपराधियों के पैर उखाड़ने के लिए पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है।