पटना न्यूज डेस्क: महावीर कैंसर संस्थान के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि हाल ही में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम मिलने की जो बात सामने आई है, उससे घबराने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन मुख्य रूप से भूजल में मौजूद यूरेनियम स्तर को समझने के लिए किया गया था और इस पर अभी और गहराई से रिसर्च की आवश्यकता है। उनके अनुसार स्तनपान बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और जरूरी पोषण है, इसलिए माताओं को इसे रोकना नहीं चाहिए।
संस्थान ने बताया कि यह रिसर्च बिहार के छह जिलों में 17 से 35 वर्ष की उम्र वाली सिर्फ 40 महिलाओं पर किया गया था। इन जिलों—भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, नालंदा, समस्तीपुर और कटिहार—में भूजल में यूरेनियम का स्तर 0 से 5.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच पाया गया था। स्तन दूध में यूरेनियम के लिए कोई तय मानक नहीं है, इसलिए सीधे किसी बड़े खतरे की घोषणा नहीं की जा सकती। विशेषज्ञों ने बस इतना कहा कि आगे की जांच से तस्वीर और साफ होगी।
अध्ययन में यह संकेत जरूर मिला कि लगभग 70% बच्चों में गैर-कैंसर वाले स्वास्थ्य प्रभाव दिखने की संभावना हो सकती है, लेकिन कैंसर के जोखिम का कोई सीधा सबूत नहीं मिला। शोधकर्ताओं ने कहा कि भूजल में यूरेनियम बढ़ना भारत के कई राज्यों में चिंता का विषय बन चुका है, जिसमें बिहार के कई जिले भी शामिल हैं। हालांकि दूध में मौजूद यूरेनियम का स्तर इन जगहों पर बहुत कम ही पाया गया है।
पहले हुए अध्ययनों में बिहार के 11 जिलों में भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इस बार लिए गए दूध के नमूने उन्हीं जिलों में से छह जगहों से लिए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरेनियम का स्रोत पीने का पानी या वही खाद्य सामग्री हो सकती है जो उसी इलाके में उगाई जाती है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने दोहराया कि स्तनपान बंद करना बिल्कुल भी समाधान नहीं है और जब तक कोई डॉक्टर अलग से सलाह न दे, माताओं को सामान्य रूप से स्तनपान कराते रहना चाहिए।