पटना न्यूज डेस्क: पटना और आसपास के शहरी इलाकों में गमला व फार्मिंग बेड योजना के लिए आवेदन अब शुरू हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 2.63 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद यह योजना पटना सदर, फुलवारीशरीफ, दानापुर, खगौल और बिहटा के लोगों के लिए शुरू की गई है। इस पहल का मकसद है छतों पर जैविक खेती को प्रोत्साहन देना और प्रदूषण के स्तर में कमी लाना।
योजना के तहत गमला यूनिट की कीमत 10 हजार रुपये तय है, जिस पर 75% यानी 7500 रुपये सब्सिडी दी जाएगी। वहीं फार्मिंग बेड की 60 हजार रुपये वाली यूनिट पर 45 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। इस वर्ष राशि बढ़ाने से लोगों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। जिला उद्यान पदाधिकारी तृप्ति गुप्ता के अनुसार, छतों पर बागवानी से ताजी सब्जियां उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
शहरी इलाके के आवेदक गमला योजना के तहत प्रति यूनिट 30 गमले और पौधे ले सकेंगे, और अधिकतम पांच यूनिट प्राप्त कर सकते हैं। जिले को गमला योजना के लिए 2400 यूनिट और फार्मिंग बेड के लिए 180 यूनिट का लक्ष्य दिया गया है। चयन प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम के माध्यम से होगी ताकि पूरा सिस्टम पारदर्शी बना रहे। फार्मिंग बेड के एक यूनिट में तीन पोर्टेबल बेड, दो ऑर्गेनिक किट, छह फ्रूट बैग और पांच स्पाइनच ग्रोइंग बैग शामिल होंगे, जबकि चयनित एजेंसियां इंस्टॉलेशन के साथ महीने में दो बार मेंटेनेंस भी करेंगी।
लाभुक फार्मिंग बेड की अधिकतम दो यूनिट और संस्थाएं पांच यूनिट तक ले सकती हैं। सब्सिडी दो किस्तों में दी जाएगी, जिसमें पहली 40,500 रुपये और दूसरी 4,500 रुपये रहेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छतों पर ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना है ताकि घरों में सब्जियां व फल आसानी से मिल सकें और शहरी क्षेत्रों में तापमान व प्रदूषण में कमी आए। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार को उम्मीद है कि अधिक लोग जुड़कर पटना को ‘ग्रीन रूफटॉप सिटी’ बनाने में भूमिका निभाएंगे।