पटना न्यूज डेस्क: राजधानी पटना में सड़क दुर्घटनाओं की तस्वीर लगातार डराने वाली होती जा रही है। वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर के बीच हुए हादसों में 736 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 426 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दौरान कुल 1102 मामले दर्ज किए गए, जो यह दिखाते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर हालात बेहद चिंताजनक हैं।
आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीना सबसे ज्यादा खतरनाक रहा। इस महीने 129 एफआईआर दर्ज हुईं और 92 लोगों ने जान गंवाई। मई और जून में भी हादसों की संख्या काफी ज्यादा रही। जनवरी में 61, मार्च में 76, अप्रैल में 54 और मई में 89 मौतें दर्ज की गईं। जुलाई और अगस्त में भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा और दोनों महीनों में 71-71 लोगों की जान चली गई।
हालांकि अक्टूबर में मृतकों की संख्या कुछ कम रही, लेकिन नवंबर में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई और 46 लोगों की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल होने वालों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है। फरवरी में 60, जून में 50 और जुलाई में 48 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। कुल मिलाकर 11 महीनों में 426 गंभीर घायल यह संकेत देते हैं कि सड़क हादसे कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, नशे में वाहन चलाना, ओवरलोडिंग और गलत दिशा में ड्राइविंग हादसों की बड़ी वजहें हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी उपेंद्र पाल ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लें। उन्होंने बताया कि जल्द ही विशेष जांच अभियान और जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।