पटना न्यूज डेस्क: दिल्ली में एक बिहारी छात्र की निर्मम हत्या के विरोध में आज पटना यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने कैंपस में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जिसमें न केवल मृतक छात्र को याद किया गया, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कड़े प्रहार किए गए। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि यह केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में बिहारियों के प्रति बढ़ती नफरत और सरकार की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है।
छात्र नेताओं ने इस घटना को पूरे बिहार की 'सामूहिक विफलता' (Collective Failure) करार दिया है। छात्र आदित्य ने सत्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहारियों के साथ हो रही हिंसा का मुख्य कारण हमारे नेताओं की चुप्पी और डरपोक रवैया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि यदि शासन की मंशा साफ हो, तो एक फोन कॉल पर इंसाफ मुमकिन है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग मौन साधे हुए हैं। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बिहार सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे और कारगिल चौक जाम करेंगे।
श्रद्धांजलि सभा में पलायन और पहचान के नाम पर हो रही हिंसा का दर्द भी छलका। छात्र अभिषेक ने कहा कि पहले मुंबई और गुजरात में बिहारियों को निशाना बनाया जाता था और अब दिल्ली में भी वही हो रहा है। आलम यह है कि केवल 'बिहारी' पहचान के आधार पर हिंसा की जा रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि जब बिहार से 40 सांसद संसद में बैठते हैं, तब भी यहां के युवाओं को सुरक्षा और सम्मान क्यों नहीं मिल पा रहा?
छात्रों ने सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि अब बिहार के युवाओं को बख्श दिया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि राज्य में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा किए जाएं ताकि पलायन का दंश खत्म हो और किसी बिहारी छात्र को बाहर जाकर प्रताड़ित न होना पड़े। इसके साथ ही, छात्रों ने दिल्ली की घटना में शामिल हेड कांस्टेबल और अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग बुलंद की है।