पटना न्यूज डेस्क: पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की मतगणना के दौरान एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। गिनती के वक्त कई ऐसे बैलेट पेपर मिले, जिन पर मतदाताओं ने उम्मीदवारों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां लिख रखी थीं। कुछ मतपत्रों में तो सभी प्रत्याशियों के नाम पूरी तरह काट दिए गए थे, जिससे वे अमान्य घोषित कर दिए गए।
मतगणना में तैनात कर्मचारियों के अनुसार, इस बार असंसदीय भाषा वाले बैलेट की संख्या अपेक्षा से अधिक रही। कई छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया और छात्र राजनीति को लेकर नाराजगी भी सीधे मतपत्र पर लिखी। नियमों के तहत ऐसे सभी बैलेट को रद्द कर दिया गया, क्योंकि मतपत्र पर केवल निर्धारित तरीके से मतदान ही मान्य होता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अध्यक्ष पद के लिए 7658 वोट डाले गए, जिनमें 7343 वैध और 315 अमान्य पाए गए। वहीं, महासचिव पद पर 7688 मत पड़े, जिनमें 7178 वैध रहे और 510 रद्द कर दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि पहले इतनी बड़ी संख्या में टिप्पणी वाले या काटे गए मतपत्र नहीं मिले थे।
चुनाव पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह रुझान छात्रों के एक वर्ग में बढ़ते असंतोष की ओर इशारा करता है। इस बार मतदान प्रतिशत भी अपेक्षाकृत कम रहा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्र संघ चुनाव में ‘नोटा’ जैसा विकल्प जोड़ा जाना चाहिए, ताकि असहमति रखने वाले छात्र औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज करा सकें।