पटना न्यूज डेस्क: आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम सोमवार सुबह पटना पहुंची और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार नायक को हिरासत में ले लिया। हालांकि, जब टीम उन्हें ट्रांजिट रिमांड के लिए अदालत में पेश करने पहुंची तो कोर्ट ने “प्रक्रियात्मक खामियों” का हवाला देते हुए रिमांड देने से इनकार कर दिया।
पटना सिटी (ईस्ट) के एसपी भानु प्रताप सिंह के अनुसार, 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी नायक, जो वर्तमान में आईजी (फायर एंड होम गार्ड्स) के पद पर तैनात हैं, को सुबह करीब 6 बजे उनके सरकारी आवास से उठाया गया। आंध्र पुलिस ने बाद में स्थानीय पुलिस से संपर्क कर अदालत तक पहुंचने में सहयोग मांगा। घटना के दौरान होमगार्ड के जवानों ने गिरफ्तारी के तरीके पर नाराजगी जताई, जिन्हें स्थानीय पुलिस ने समझाकर शांत कराया।
अदालत में यह तथ्य रखा गया कि पटना पुलिस को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। साथ ही आंध्र प्रदेश पुलिस के पास न तो केस डायरी थी और न ही गिरफ्तारी वारंट। इसे गंभीर प्रक्रिया त्रुटि मानते हुए कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुनील कुमार नायक को मुक्त कर दिया गया और उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं माना गया।
यह मामला वर्ष 2024 में आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जो टीडीपी नेता और आंध्र विधानसभा के उपाध्यक्ष रघु राम कृष्ण राजू की शिकायत पर दर्ज की गई थी। उन्होंने 2021 में कथित हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाया था, जब वे नरसापुरम से सांसद थे। उस समय नायक आंध्र प्रदेश में डीआईजी (सीआईडी) के पद पर कार्यरत थे।